
“आम जनता में यह प्रतिक्रिया होने लगी है कि अब महंगी और लूटने वाले हॉस्पिटल से दूर मानवता की सच्ची सेवा भावना से युक्त बीरा सिंह मल्टी स्पेशालिटी हॉस्पिटल भिलाई में ही ईलाज कराएं।”
भिलाई। बीरा सिंह मल्टी स्पेशालिटी हॉस्पिटल, फल मंडी भिलाई में लगातार 4 वर्षों से नि:शुल्क डायलिसिस सेवा संचालित की जा रही है।
इस सेवा के अंतर्गत अब तक 496 मरीजों का नि:शुल्क डायलिसिस किया जा चुका है।
ज्ञात हो कि हॉस्पिटल द्वारा आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को डायलिसिस के दौरान लाइन लगने तक आने वाले खर्चों का भार भी स्वयं वहन किया गया है, साथ ही जरूरतमंद मरीजों को समय-समय पर आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराई जाती है, जिससे उन्हें इलाज में किसी प्रकार की परेशानी न हो।
बीरा सिंह मल्टी स्पेशालिटी हॉस्पिटल के डायरेक्टर इंद्रजीत सिंह दुर्ग जिले के सर्व समाज कल्याण समिति के अध्यक्ष और एचटीसी ट्रांसपोर्ट के डायरेक्टर भी है। यूं तो जिले में बड़े बड़े उद्योगपति, उद्यमी और व्यवसायी है, पर मानवीय मूल्यों के प्रति संवेदना को समझते हुए हर जरूरतमंद इंसान के सुख दुख में शामिल हो कर उनकी समस्याओं को दूर करने में हमेशा साथ निभाने वाले भिलाई में एक ही जिंदादिल इंसान सरदार वीरा सिंह सुपुत्र इंद्रजीत सिंह है।
इंद्रजीत सिंह की मानव के प्रति संवेदना और सेवा भावना एक “सच्चे सरदार” “सिक्ख” की खूबियां दर्शाती हैं। और गुरु गोविंद सिंह जी के प्रेरणादायक विचारो और संदेशों पर अमल करते रहे हैं:
गुरु गोविंद सिंह जी ने साहस, त्याग और समानता का संदेश दिया, जिसमें “सवा लाख से एक लड़ाऊं, चिड़ियन ते मैं बाज तुड़ाऊं” (अर्थ: एक-एक को सवा लाख के बराबर लड़ाऊं) सर्वोच्च बलिदान और वीरता को दर्शाता है। उनकी शिक्षाओं में “इंसान से प्रेम ही ईश्वर की सच्ची भक्ति है” और मेहनत से जीवन को सुंदर बनाने का संदेश प्रमुख है।
गुरु गोविंद सिंह जी के प्रसिद्ध पंक्तियाँ और प्रेरणादायक विचार और उन प्रेरणादायक विचार पर इंद्रजीत सिंह कर रहे है अमल….
- वीरता और आत्मसम्मान: “सवा लाख से एक लड़ाऊं, चिड़ियन ते मैं बाज तुड़ाऊं, तबै गुरु गोबिंद सिंह नाम कहाऊं” (जब मैं एक को सवा लाख से लड़ाऊँ और चिड़ियों को बाज से लड़वा दूँ, तब मैं गुरु गोविंद सिंह कहलाऊं)।
- कर्म का महत्व: “अच्छे कर्मों से ही आप ईश्वर को पा सकते हैं। अच्छे कर्म करने वालों की ही ईश्वर मदद करता है”।
- सेवा भाव: “गरीब और बेसहारा लोगों की सेवा ही सच्ची भक्ति है”।
- साहस और वीरता: “जब तक आप अपने अंदर से अहंकार नहीं मिटा देते, तब तक आपको वास्तविक शांति प्राप्त नहीं होगी”।
- कर्मठता: “छोटा हो या बड़ा, कोई भी काम हो उसमें लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए”।
- मानवता: “इंसान से प्रेम ही ईश्वर की सच्ची भक्ति है”।
- ईमानदारी: “अपनी कमाई का दसवां हिस्सा दान करना चाहिए”। निश्चित ही सरदार इंद्रजीत सिंह एक सच्चे सिक्ख गुरु गोविंद सिंह जी की प्रेरणा पर चल कर मानवता की सेवा कर रहे है।
ज्ञात हो कि क्षेत्र में धार्मिक अनुष्ठान हो या कि दीगर समाज में विवाह कार्यक्रम, जरूरतमंद छात्र की फीस हो या समस्या ग्रसित व्यक्ति को चिकित्सा सुविधा हेतु आर्थिक सहायता चाहे वह सर्व समाज का कोई भी कार्यक्रम ही क्यों ना हों, हमेशा सबके सुख दुख में शामिल होकर सबको यथा स्थिति सहयोग करते रहे है।
आम जनता में भी हो रही प्रतिक्रिया
आम जनता में यह प्रतिक्रिया होने लगी है कि अब महंगी और लूटने वाले हॉस्पिटल से दूर मानवता की सच्ची सेवा भावना से युक्त बीरा सिंह मल्टी स्पेशालिटी हॉस्पिटल भिलाई में ही ईलाज कराएं।
इंद्रजीत सिंह की मानव के प्रति संवेदना और सेवा भावना एक “सच्चे सरदार” “सिक्ख” की खूबियां दर्शाती हैं। वाहे गुरु जी का धन्यवाद कि एक सरदार “सिक्ख” भिलाई में हम सबके बीच है, तो फिर हम सब क्यों ना कहें ” वाहें गुरजी की खालसा वाहे गुरु जी की फतेह।