
भिलाई। उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानंन्द: सरस्वती 1008 जी महाराज का विधायक देवेंद्र यादव के निवास में



बता दे कि उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानंन्द: सरस्वती 1008 जी महाराज के भिलाईनगर विधायक देवेंद यादव निवास में आगमन को लेकर विगत दिनों धर्मेन्द म यादव ने भिलाई काफी हाउस में पत्रकार वार्ता कर उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानंन्द: सरस्वती 1008 जी महाराज जी के स्वागत एवं दर्शन के लिए आम जनता के साथ दर्शन अभिलाषीयों को भी सूचित किया था।

उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानंन्द: सरस्वती 1008 जी ज्योतिर्मठ के वर्तमान जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती महाराजसनातनी दृष्टिकोण से समस्त विश्व में भारत की भूमि सबसे अधिक पवित्र मानी जाती है। इसी भूमि पर समय-समय पर अनेक भगवदवतार हुए हैं। भगवान् नारायण से आरम्भ होने वाली गुरु-परम्परा में भगवत्पाद आद्य शंकराचार्य जी संवत् २०२० से २५३० वर्ष पूर्व अवतरित हुए और उन्होंने भारत को एकता के सूत्र में निबद्ध किया। भारत की चार दिशाओं में चार वेदों के आधार पर चार आम्नाय पीठों की स्थापना कर देश की धार्मिक व साँस्कृतिक सीमा को सुदृढ बनाया। इन्हीं चार पीठों में से अन्यतम उत्तराम्नाय ज्योतिर्मठ बदरिकाश्रम हिमालय के वर्तमान जगद्गुरु शंकराचार्य परमाराध्य स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती’१००८’ आज सनातन संजीवनी के रूप में हम सबको प्राप्त हैं। ‘परमाराध्य’ स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती’१००८’; यह एक ऐसा नाम है जिनका जीवन एक आदर्श के रूप में पूरे विश्व के सामने है। जिस प्रकार सूर्य को छिपाकर नहीं रखा जा सकता। वह जहाँ रहता है स्वयं प्रकाशित होकर पूरे विश्व को प्रकाशित करता है ऐसे ही ‘परमाराध्य’ स्वयं तो आत्मज्ञान के आनन्द से परिपूर्ण हैं ही पर जो भी इनके सम्पर्क में आ जाता है वह भी आत्मज्ञान की ओर अग्रसर होकर आनन्दित हो जाता है। आविर्भाव : उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के ब्राह्मणपुर गाँव में श्रावण शुक्ल द्वितीया दुन्दुभि संवत् २०२६ (तदनुसार दिनांक १५ अगस्त १९६९ ई.) दिन शुक्रवार को पूजनीया माता अनारा देवी तथा पिता पं रामसुमेर पाण्डेय जी ने इस अनमोल रत्न को जन्म दिया और नाम रखा उमाशंकर पाण्डेय।शिक्षा : ब्राह्मणपुर के स्थानीय विद्यालय में प्रारम्भिक शिक्षा हुई। बाल्यकाल से ही उमाशंकर की कुशाग्र बुद्धि एवं प्रत्युत्पन्नमति से सभी चमत्कृत थे। तीसरी कक्षा में ही अध्यापकगण इनको अपनी कुर्सी पर बिठाकर पढाते थे। छठवीं कक्षा तक की शिक्षा स्थानीय विद्यालय में हुई। इसके बाद की शिक्षा गुजरात के बडौदा स्थित महाराजा सयाजी राव युनिवर्सिटी में हुई। इसके बाद पूज्य ज्योतिष्पीठाधीश्वर एवं द्वारका शारदापीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री स्वरूपानन्द सरस्वती जी महाराज का सान्निध्य पाकर उनकी प्रेरणा से काशी में संस्कृत अध्ययन के लिए आए जहाँ उनको धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज की उनके अन्तिम समय में सेवा करने का सौभाग्य भी प्राप्त हुआ। यहॉ पर बाजोरिया संस्कृत महाविद्यालय में अध्ययन किया फिर उसके बाद सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय में नव्य व्याकरण से आचार्य तक की पढाई पूरी की। आपने भट्टोजि दीक्षित कृत ‘शब्दकौस्तुभ’ पर अपना शोध लिखा। शिक्षाचार्य, शिक्षाशास्त्री कक्षाओं में अध्ययन किया और स्वतन्त्र प्रत्याशी के रूप में छात्रसंघ के उपाध्यक्ष और विद्यार्थी परिषद् के प्रत्याशी के रूप में अध्यक्ष पद को भी अलंकृत किया और अपनी नेतृत्व क्षमता का सबको आभास कराया। 22 साल तक स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य रहे। फिर इन्हें काशी में स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी का सानिध्य प्राप्त हुआ। यहां उन्होंने दंडी दीक्षा ली, गुजरात की द्वारका-शारदा पीठ और उत्तराखंड की ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती के ब्रह्मलीन होने के बाद अविमुक्तेश्वरानंद को ज्योतिष पीठ के नए शंकराचार्य बने।

विधायक देवेंद्र यादव निवास में शंकराचार्य जी के आगमन पर दर्शन के लिए बड़ी संख्या में भक्तजन श्रद्धालु और हिंदुधर्मलंबी जन एकत्रित हुए। पुजन व दर्शन पश्चात शंकराचार्य महाराज जी द्वारा प्रसादी वितरण कर आशिर्वाद दिया गया। शंकराचार्य महाराज जी के दर्शन एवं आशिर्वाद प्राप्ति के लिए भिलाई शहर की बड़ी बड़ी हस्तियां भावपूर्वक भगवान शंकर स्वरूप स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती शंकराचार्य महाराज जी के श्री चरणों में तन मन समर्पण कर आशिर्वाचनों को ग्रहण कर बैठे थे। वही आसनाधीन स्वामिश्रीःशंकराचार्य महाराज ने देवेंद्र यादव की मुसीबत पर निर्दोषिता की बात बताएं जाने की जानकारी पर कहा कि स्वामिश्रीःशंकराचार्य महाराज आपके मुसीबत में साथ देने के लिए खड़ा है,और कहा कि कोई भी निर्दोष को उनकी मुसीबत में साथ देना चाहिए, साथ नही छोड़ना चाहिए। धर्म अधर्म, भोजन, भक्ष्य, भाष्य, सोना, जागना, संगती में आना जाना, ग्रहण और त्याज्य पर प्रबोध कराते हुए कहा कि धर्म करने के लिए कुछ अतिरिक्त करने की जरूरत नहीं है और अधर्म करने के लिए भी कुछ अतिरिक्त जरूरत नहीं है। जो भी खाते हो विचार करके खाओगे भक्षय काल, भेद ,भाव का विचार कर भोजन करना ही धर्म है। धर्म धर्म आयात करने की वस्तु नहीं सही दिशा देने की चीज है आप जो कुछ करते हैं उसी को सतर्कता से करते हैं तो वह धर्म है और उसमें लापरवाह से करते हैं तो वह धर्म हो जाता है। दोनो के फल से आप परिचित है।

स्वामिश्रीःशंकराचार्य महाराज जी ने उपस्थितजनो को भारत देश की राष्ट्र की सनातनी शाश्वत सत्यता की ओर ध्यान आकृष्ट करते हुए कहा कि पहले आप जो बोलते थे कि ऐसा हो तो वह हो जाता था। आप जो कहते थे वह हो जाता था पर वह अब क्यों नही? क्यों वह मुःखाग से सत्यता चली गई। उसका कारण है की हम गौ माता की हत्यारे हैं गौ माता की हत्या का पाप हमें लग चुका है। उस पाप के कारण वह सात्विकता चले गई है।
मतदान बनाम गौ रक्षित सरकार ना होने पर लग रहे है पाप।
स्वामिश्रीःशंकराचार्य महाराज जी ने आगे कहा कि आज जो बात आज सामने है उस पर लेकर चलना चाहेंगे, उसकी ओर ध्यान आकर्षित कराना चाहूंगा। हमारा जो काम धर्म होना चाहिए था वह अधर्म हो रहा है हमको पाप में डाल रहा है और पाप छोटे-मोटे पाप नहीं बड़े पाप में डाल रहा है उसकी और ध्यान आकर्षित करना चाहेंगे और वह क्या और वह है हमारा मतदान।
हमें जो वोट करते हैं जब से देश आजाद हुआ है तब से कर रहे हैं जाने कितनी सरकारी हमने बना चुके हैं लेकिन जितनी भी सरकारें हमने अभी तक बनाई है अपने वोट देकर उन सबसे हमको बड़ा पाप लगा है और आज भी लग रहा है मतदान करना पाप हो रहा है क्यों? क्योंकि मतदान करके जो सरकार हम बनाते हैं वहीं सरकार गौ हत्या को प्रोत्साहन दे रही है और गौ हत्या निरंतर देश में होते चले जा रही है और उसका पाप किसके उपर लगेगा। जो हत्या कर रहे हैं उसके ऊपर। सरकार के ऊपर सरकार। सरकार कोई मूर्त वस्तु तो है नहीं। वह तो हमारे वोट से बनती है इसलिए गौ हत्या का जो महा पाप लग रहा है वह हमारे सर लग रहा है। वह आपके मतदान से लग रहा है। इसलिए मतदान सोच समझकर जो गौ माता को रक्षा करे, गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा दे। गौ माता की हत्याए बंद करवाए, गौ माता को रामा गौ माता की उपाधि दिलाए ऐसे सरकार को मतदान करना है, ऐसे भाई को वोट करना है। गौ माता की रक्षा और हत्या बंद कराने के लिए सड़क पर उतर लड़ाई लड़ने की तैयारी होने कहा। गौ रक्षा, धर्मान्तरण पर रोक, धर्म अधर्म , भक्ष्य अभक्ष्य, नृंदा, एवं संगति पर शास्त्रनुकुल प्राभ्ष्य बोध कराते हुए स्वामिश्रीःशंकराचार्य महाराज जी ने गौ माता रक्षा की बात की और संकल्प कराए कि गौ माता की रक्षा करे। और कहा की जो गौ माता की रक्षा करे उन्ही दल और पार्टी को वोट दे। आशिर्वाद और आशिर्वचनों को प्राप्ती के लिए विधायक देवेंद्र यादव के परिवार जनों के साथ भिलाई नगर निगम के महापौर नीरज पाल, कांग्रेस के वैशालीनगर विधानसभा के छाया विधायक मुकेश चंद्राकर, वरिष्ठ कांग्रेसी संदीप निरंकारी के साथ कई वरिष्ठ कांग्रेसी एवं भाजपाई नेता एवं पार्षदों के साथ दर्शनभिलाशी श्रद्धालु भक्तगण, अनुयाई एवं जनता उपस्थित थे।

ज्ञात हो कि भिलाई के इतिहास में पहली बार एक सप्ताह के भीतर दो दो पीठ के शंकराचार्य जी का आगमन हुआ है, 2 मार्च 2024 शनिवार को विशाल हिंदू राष्ट्र धर्म सभा के लिए धर्मध्वजरक्षक परमधर्माधीश सर्वोच्च गुरु अनंत श्री विभूषित ऋग्वेदीय पूर्वाम्नाय गोवर्धनमठ-पुरीपीठाधीश्वर परमपूजनीय श्रीमज्जग्दगुरू शंकराचार्य स्वामी श्री निश्चलानंद सरस्वती जी महाराज का तीन दिवसीय जामुल के उपाध्याय निवास (ईश्वर उपाध्याय) में मंगलमय आगमन हुआ था, जहां दर्शन, दीक्षा, संगोष्ठी व हिन्दू राष्ट्रधर्म धार्मसभा को शंकराचार्य ने संबोधित किया। और अब उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानंन्द: सरस्वती 1008 जी ज्योतिर्मठ के वर्तमान जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती महाराज जी का भिलाई की इस्पात नगरी मिनी भारत में आगमन किसी बड़ी परिवर्तन की ओर इशारा कर रही है।

“एक सप्ताह के भीतर दो शंकराचार्य भगवान के जामुल और इस्पात नगरी भिलाई आगमन को लेकर आमजनता में कौतुहुलता है तो वही हिन्दू धर्म के कट्ठटरपंथी विद्वान एवं हिन्दुत्व के सामाजिक दिशाचालक शंकराचार्ययो के आगमन को अत्यधिक महत्वपूर्ण मान रहे हैं, जिसका मंगलमय एवं दूरगामी परिणाम जल्द ही सभी सनातनीयों एवं हिंदुओं को प्राप्त होगा ,गौ रक्षा, धर्मान्तरण पर रोक, घर वापसी व शास्त्रों की शिक्षा आदि में तीव्र गति से कार्य होगा।