
Publish Date: | Sat, 30 Oct 2021 01:39 AM (IST)
नारायणपुर। लाकडाउन की परिस्थितियों का डटकर मुकाबला करने वाली महिला समूहों ने अपनी आमदनी जुटाने के लिए गोबर से भी नए विकल्प तलाश और तराश लिए हैं। किसी ने गोबर के इतने बेहतर उपयोग सामग्री के बनाने के बारे में सोचा भी नहीं होगा। इन ग्रामीण महिलाओं ने कर दिखाया है। हाथ की कलाकारी से बने दीपावली में घर को रोशन करने गोबर के दीए जिले की समूह की महिलाओं ने तैयार किये हैं। इस दीवाली पूजा की थाली में मां लक्ष्मी को प्रसन्ना करने के लिए गोबर के दिए जलाए जाएंगे। एलएफ महिला स्व सहायता समूह नारायणपुर की महिलाओं ने दीपावली के पावन पर्व को ध्यान में रखते हुए दिया बनाने का शुरू कर दिया है। समूह की महिलाओं से बातचीत करने पर उन्होंने बताया कि वे दीए के अलावा गमला, खाद बनाने के काम में भी जुटी हुई है। उन्होंने अभी तक ढाई हजार दीए तैयार किए है, जिन्हें बाजारों में 10 रुपये के छह दियों के हिसाब से विक्रय करेंगी। हम बाजार से फैक्टरी मेड या आयातित सामग्री को खरीदकर अपने देश के पैसे को अंजाने ही विदेशों में भेज देते हैं। लेकिन अब की बार आप लोगों की बारी है, कि आप दीपावली की सामग्री स्थानीय छोटे-छोटे विक्रेताओं से खरीदकर इन जरूरत मंदों की मदद करने में आगे आए। आय में इजाफाछत्तीसगढ़ शासन की सुराजी गांव योजना और गोधन न्याय योजना के समन्वय से गांव में ग्रामीणों एवं महिलाओं को रोजगार के साथ ही उनकी आय में इजाफा होने लगा है। गौठानों से जुड़ी महिला समूह अब बड़े पैमाने पर वर्मी खाद के उत्पादन के साथ साथ अब गोबर से अन्य उत्पाद बनाने लग गए हैं और विक्रय कर इससे आमदनी अर्जित करने लगी है। गोठानों में बढ़ी गोबर की आवक गोधन न्याय योजना के कारण अब गोठानों में गोबर की आवक बढ़ गई है, जिससे महिला समूहों द्वारा वर्मी खाद एवं अन्य उत्पाद बनाने के काम में भी तेजी आई है। इसका लाभ गोपालकों, किसानों और ग्रामीणों के साथ-साथ महिला समूूहों को भी मिलने लगा है। गाय के गोबर से शुद्धता के साथ बनाये गये ये सभी सामान पूजनोपयोगी हैं। कलेक्टर धर्मेश कुमार साहू ने गोठान के द्वारा महिला समूहों को आगे लाने के लिए हर संभव प्रयास करने के निर्देश दिए हैं।
Posted By: Nai Dunia News Network




