
कोरबा / शहर के भीतर के दो रेतघाट गेरवा और सीतामढ़ी को मानसून खतम होने के दो महीने बाद अब तक प्रारंभ नहीं किया गया है। गेरवा घाट में सर्वेश्वर एनीकट का भर जाने की वजह से वैकल्पिक नए घाट की तलाश की जानी है, पर खनिज विभाग की लापरवाही की वजह से यह कार्य भी तक पूर्ण नहीं हो सका है। सीतामढ़ी रेतघाट का ठेकेदार नवीनीकरण के लिए आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर रहा। इसकी वजह से यहां भी पेंच फंसा हुआ है। उधर अवैध रेत उत्खनन और परिवहन धड़ल्ले से चल रहा। डेढ़ हजार रूपये ट्रैक्टर में बिकने वाला रेत साढ़े तीन से चार हजार में बेचा जा रहा।
शहर के घाट बंद होने से ढेंगुरनाला, सुमेधा, धनगांव, भिलाई खुर्द सहित दर्जन भर से अधिक जगहों से रेत का अवैध परिवहन हो रहा है। नौबत यह आ गई है कि माफिया रेत क्विंटल भाव से बेच रहे हैं। रेत की किल्लत से आम लोगों के लिए आवास बनाना छड़ और सीमेंट से भी अधिक महंगा साबित हो रहा। तीन लाख से उपर आबादी वाले शहर में मानसून बीतने के दो माह बाद भी समस्या का निराकरण न होना प्रशासनिक नाकामी को दर्शाता है। रेत की किल्लत को माफियाओं ने कमाई का जरिया बना लिया है। निर्माण कराने वाले आम लोगों को रेत खरीदी के नाम पर जेब ढीली करनी पड़ रही। इधर अधिक कीमत में रेत बिक्री की जानकारी होने के बावजूद खनिज विभाग अंजान बना है। घाटों का वैध रूप से शुरू नही होना वाहन मालिकों के लिए वरदान साबित हो रहा।
शहर के निकट भैसामुड़ा और तरदा घाट को खनिज ने स्वीकृति दे दी है, लेकिन यहां से शहर तक परिवहन में खर्च अधिक होने की वजह से लोग अवैध रेत को लेने पर मजबूर हैं। गेरवा घाट से रेत शहर में आसानी से पूर्ति हो जाती थी लेकिन सर्वेश्वर एनीकट के अस्तित्व में आने के बाद घाट में पानी भर गया है, इस वजह से अघोषित घाटों से रेत निकाला जा रहा है। वैकल्पिक तौर पर नए घाट की तलाश अभी तक पूरी नही हुई है। गेरवा के बंद घाट के विकल्प के तौर पर गेवरा-2 घाट को देखा जा रहा है। पहले से ही यहां एक घाट चालू है, ऐसे में एक जगह में दूसरा घाट शुरू करना खनिज विभाग के लिए मुश्किल है।
इसी तरह सीतामढ़ी घाट के नवीनीकरण के लिए पूर्व ठेकेदार ने अभी तक आवश्यक दस्तावेज जमा नही किया है। जिससे घाट शुरू करने में देरी हो रही है। ठेका निरस्त कर नई निविदा जारी नहीं करना भी रेत की किल्लत को बढ़ावा देना साबित हो रहा। खनिज विभाग की कार्यशैली से यह स्पस्ष्ट कि वैध रेत घाट शुरू करने में जान बूझ कर विलंब किया जा रहा ताकि अवैध रूप से तस्कर करने वालों का काम चलता रहे।
कोयला में व्यस्त, गौण खनिज दरकिनार
जिला खनिज विभाग को इस वर्ष 2100 करोड़ राजस्व आय संग्रह का लक्ष्य मिला है। बीते वर्ष 1800 करोड़ का लक्ष्य मिला था जिसे विभाग ने कोरोना काल होते हुए भी पूरा कर लिया था। मुख्य खनिज कोयल से राजस्व आय की पूर्ति होम से गौण खनिज के संरक्षण को नजरअंदाज किया जा रहा। मुख्य खनिज से आय लक्ष्य पूरा हो जाने पर विभाग सरकार की नजर में वाहवाही लूट लेता है और गौण खनिज की एैब छुप जाता है।
फ्लाइऐश कारोबार को लगा ग्रहण
रेत घाटों के बंद होने शहर भीतर संचालित फ्लाईऐश कारोबार ने दम तोड़ना शुरू कर दिया हैं। लंबी दूरी से रेत परिवहन के कारण फ्लाईश के 3500 रूपये से बढ़कर 4000 ट्रैक्टर हो गया हैं। बंगला भट्टे में मिलने वाली ईंट के बराबर दाम होने से लोग पके ईंट की खरीदी कर रहे हैं। फ्लाइऐश के करोबार को बढ़ावा देना यानि सीधे तौर राखड़ बांध से राखड़ को कम करना है। रेत की कमी के कारण बांधों से सूखा राखड़ का उठावा भी कम हो गया है, जो पर्यावरण प्रदूषण को बढ़ावा साबित हो रहा है।
नौ माह में अवैध उत्खनन व परिवहन के 63 प्रकरण
वित्तीय वर्ष के नौ माह बीत जाने के बाद अब खनिज विभाग ने 63 प्रकरण दर्ज किया है। बीते वर्ष नवंबर माह तक 82 प्रकरण दर्ज किए गए थे। कोरोना काल में निर्माण बंद रहने के कारण प्रकरण में कमी आई है। जिले में रेत के 22 घाट स्वीकृत हैं। जिसकी निगरानी के लिए नियमानुसार खनिज विभाग में तीन फील्ड इंस्पेक्टरों की जरूरत है। एक मात्र फील्ड इंस्पेक्टर की नियुक्ति से घाटों का सही समय पर निरीक्षण नही हो रहा। जिसका फायदा उठाते हुए दूर दराज के नदी नालों से दिन दहाड़े रेत की चोरी हो रही है।
भाजपा के पूर्व अध्यक्ष के नेतृत्व में विरोध आज
भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष अशोक चावलानी का कहना है कि प्रदेश के अन्य जिलो में रेत की रायल्टी खोल दी गई है, लेकिन अभी तक शहर में चालू नहीं की गई है। स्थानीय नेताओं के संरक्षण में ब्लैक में रेत बेची जा रही है। भारतीय जनता पार्टी के शासनकाल में जो रेत 700 से 800 में प्रति ट्रैक्टर उपलब्ध हो जाती थी। इन दिनों आमजनता 3000 से 4000 की दर पर खरीद रही है। बड़े स्तर पर आम जनता का आर्थिक शोषण किया जा रहा है। रेत की कालाबाजारी के विरोध में सोमवार 29 नवंबर को शाम तीन बजे से भारतीय जनता पार्टी कोसाबाड़ी मंडल के तत्वावधान में पूर्व जिलाध्यक्ष, प्रदेश कार्यसमिति अशोक चावलानी के नेतृत्व में रेत की नीलामी की जाएगी।
शहर घोषित गेरवा और सीतामढ़ी दोनो घाट अभी बंद है। सर्वेश्वर एनीकट बनने के कारण गेरवाघाट को शुरू करना संभव नहीं। विकल्प के तौर पर नए घाट की तालाश की जा रही है। सीतामढ़ी घाट का नवीनीकरण के लिए ठेकेदार ने दस्तावेज जमा नहीं किया है। विकल्प के तौर नए घाट की शुरू दिसंबर माह तक शुरू कर दी जाएगी।



