
दुर्ग/ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर के मार्गदर्शन एवं राजेश वास्तव जिला न्यायाधीश अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग के निर्देशन में “सचेत” नामक एक विशेष अध्यक्षता अभियान उपभोक्ता को जागरूक करने हेतु प्रारंभ किया गया। इस जागरूकता अभियान मार्च माह तक निरंतर क्रियान्वन में रहेगा। विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव राहुल शर्मा एवं पैरा लीगल वालंटियर द्वारा जनमानस के जागरूक करने हेतु बताया कि आज हर व्यक्ति उपभोक्ता है, कोई वस्तु खरीद रहा हो या फिर किसी सेवा को प्राप्त कर रहा हो।
उपभोक्तओं के साथ धोखाधड़ी, कालाबाजारी, मिलावट, अधिक मूल्य पर सामान को देना, वारंटी कार्ड देने के बाद भी सर्विस नहीं देना तथा हर जगह पर ठगा जाना आदि समस्याओं के समाधान के लिए उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम बनाया गया जो विशेष रूप से उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना है, उन्हें गलत या फिर एक्सपायरी समान को ना उपयोग में लाये इसके लिए कुछ उत्तरदायित्व एवं अधिकार भी दिए गए हैं। ग्राहकों के हितों की रक्षा के लिए उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 24 दिसंबर 1986 को लागू हुआ था। इस अधिनियम के अनुसार उस व्यक्ति को उपभोक्ता कहा जाता है जो वस्तुओं एवं सेवाओं की खरीद और उपभोग अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए करता है। यहां पर यह जानना जरूरी है कि जो व्यक्ति वस्तुओं एवं सेवाओं को बेचने के लिए वाणिज्य उद्देश्य के लिए खरीदना है, उसे उपभोक्ता नहीं माना जाता है।
यह अधिनियम उपभोक्ताओं को 6 अधिकार प्रदान करता है। वस्तुओं या सेवाओं की मात्रा गुणवत्ता शुद्धता क्षमता कीमत और मानक के बारे में जानकारी प्राप्त करने का अधिकार, खतरनाक वस्तुओं और सेवाओं से सुरक्षित रहने का अधिकार, अनुचित या प्रतिबंधात्मक व्यापार प्रथा से संरक्षित रहने का अधिकार, प्रतिस्पर्धी कीमतों पर विभिन्न प्रकार की वस्तुओं एवं सेवाओं की उपलब्धता। इस अधिनियम में राष्ट्रीय, राज्य एवं जिला स्तर पर उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग की स्थापना का प्रावधान है। उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग निम्न प्रकार की शिकायतों का निपटारा करता है जो इस प्रकार है, अधिक मूल्य वसूलना या अस्पष्ट कीमत वसूलना, अनुचित या प्रतिबंधक व्यापार व्यवहार, जीवन के लिए खतरनाक वस्तुओं और सेवाओं की बिक्री और दोषपूर्ण वस्तुओं या सेवाओं की बिक्री करना।



